*_पीएम मोदी के खिलाफ पोस्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, FIR रद्द करने से इनकार_*

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*_पीएम मोदी के खिलाफ पोस्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, FIR रद्द करने से इनकार_*

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को बेंगलुरु के एक निवासी के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पांचोली की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की.गुरुदत्त शेट्टी नामक व्यक्ति के खिलाफ प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना वाली सोशल मीडिया पोस्ट के लिए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 336(4) और धारा 79 के तहत संज्ञेय (cognisable) और जमानती अपराधों के लिए मामला दर्ज किया गया था. प्राथमिकी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि पोस्ट की गई सामग्री का उद्देश्य प्रधानमंत्री की छवि को खराब करना था.

पीठ ने टिप्पणी की, “याचिकाकर्ता ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का खुल्लम-खुल्ला दुरुपयोग किया है. हम इस स्तर पर किसी भी विवेकाधीन शक्ति का उपयोग या राहत नहीं दे सकते.” हालांकि, पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता कानून के अनुसार राहत पाने के लिए संबंधित क्षेत्राधिकार वाले उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए स्वतंत्र है.

याचिकाकर्ता के वकील ने पीठ से सात दिन की सुरक्षा (गिरफ्तारी से सुरक्षा) देने का आग्रह किया ताकि वह उच्च न्यायालय जा सके. इस पर पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि सुरक्षा देने का कोई सवाल ही नहीं उठता.

शेट्टी के वकील ने दलील दी कि उनका मुवक्किल बिना शर्त माफी मांगने के लिए तैयार है. वकील ने अपनी आशंका जताते हुए कहा, “मुझे डर है कि जैसे ही मैं गुजरात पहुंचूंगा, वे (पुलिस) मुझ पर कोई गैर-जमानती धारा जोड़ देंगे और मुझे गिरफ्तार कर लेंगे.”

 

वकील ने यह भी दलील दी कि उनका मुवक्किल उक्त ऑनलाइन पोस्ट का लेखक नहीं था और उसने केवल एक प्रश्न चिह्न (?) के साथ इसे ‘रीपोस्ट’ किया था. इस पर पीठ ने वकील से पूछा कि क्या वह चाहते हैं कि अदालत खुली अदालत में उस पोस्ट की सामग्री को पढ़कर सुनाए?

पीठ ने टिप्पणी की, “आपने कोई पश्चाताप नहीं दिखाया है. जिन लोगों के लिए आपने अपशब्दों का प्रयोग किया है, उनके प्रति अपने कार्यों के लिए आपके मन में न तो पछतावे की भावना है और न ही आपने कोई माफी मांगी है.”

अपनी याचिका में शेट्टी ने दावा किया कि 10 नवंबर को गुजरात पुलिस बिना किसी वारंट के बेंगलुरु स्थित उनके आवास पर पहुंची थी और उन्हें जबरन कार में ले जाया गया. उन्होंने कहा कि उन्हें आधी रात को रिहा किया गया और गुजरात पुलिस के जांच अधिकारी के सामने पेश होने के लिए बीएनएसएस (BNSS) की धारा 35 के तहत नोटिस थमाया गया.


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