*_तिरुपति मंदिर में फिर बड़ा घोटाला, सिल्क शॉल खरीद में सामने आई गड़बड़ी, ACB जांच के आदेश_*

Spread the love

*_तिरुपति मंदिर में फिर बड़ा घोटाला, सिल्क शॉल खरीद में सामने आई गड़बड़ी, ACB जांच के आदेश_*

तिरुपति (आंध्र प्रदेश): तिरुमला स्थित भगवान वेंकटेश्वर मंदिर की सेवा में इस्तेमाल होने वाले सिल्क शॉल की खरीद में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है. आरोप लगा है कि सिल्क फैब्रिक की जगह पॉलिएस्टर शॉल सप्लाई की गई थी, जिससे न सिर्फ तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के खजाने को चूना लगा, बल्कि भक्तों की भावनाओं को भी ठेस पहुंची. रिपोर्ट के मुताबिक, विजिलेंस जांच में इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ है. इसके बाद TTD बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज ने घटिया फैब्रिक सप्लाई करने वाली कंपनी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई और एसीबी जांच के आदेश दिए हैं.

 

दरअसल, टीटीडी ने भगवान वेंकटेश्वर मंदिर की जरूरतों के लिए ‘सिल्क शॉल’ खरीदने के लिए टेंडर मंगाए थे. इनका इस्तेमाल भगवान की सेवाओं में, अत्यंत विशिष्ट व्यक्तियों को आशीर्वाद देने और दानदाताओं को सम्मानित करने के लिए किया जाता है. इसके तहत, शहर की M/s वीआरएस एक्सपोर्ट नाम की कंपनी को 15,000 शॉल सप्लाई करने का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया. कीमत 1,389.15 रुपये प्रति शॉल तय की गई थी. क्वालिटी पर शक होने की वजह से, पिछली बोर्ड मीटिंग में तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के मुख्य सतर्कता और सुरक्षा अधिकारी (CVSO) को मामले की पूरी जांच करने का आदेश दिया गया था.

 

100% पॉलिएस्टर शॉल सप्लाई की गई

 

विजिलेंस अधिकारियों ने तिरुपति के वेयरहाउस और तिरुमला के वैभवोत्सव मंडपम से ताजा स्टॉक के सैंपल इकट्ठा किए. जब ​​इन्हें टेस्टिंग के लिए बेंगलुरु और धर्मावरम के सेंट्रल सिल्क बोर्ड्स में भेजा गया, तो हैरान करने वाली बातें सामने आईं. टेंडर की शर्तों के मुताबिक, सामग्री शुद्ध सिल्क होनी चाहिए थी. लेकिन, परीक्षण में पता चला कि यह 100% पॉलिएस्टर था. अधिकारियों ने यह भी पाया कि शॉल पर ‘सिल्क होलोग्राम’ नहीं था.

 

अधिकारियों की भूमिका पर संदेह

 

विजिलेंस रिपोर्ट में इस मामले में TTD के कुछ अधिकारियों के बर्ताव पर गंभीर आपत्ति जताई गई है. पहले, डिप्टी EO (वेयरहाउस) द्वारा भेजे गए सैंपल कांचीपुरम लैब में टेस्ट किए गए थे, और रिपोर्ट में कहा गया था कि वे अच्छी क्वालिटी के थे. लेकिन, विजिलेंस टीम द्वारा उसी स्टॉक से इकट्ठा किए गए और भेजे गए सैंपल पॉलिएस्टर निकले. इसके आधार पर, विजिलेंस टीम ने साफ किया कि या तो लैब में भेजने से पहले सैंपल बदल दिए गए थे, या रिपोर्ट में हेरफेर किया गया था.

 

55 करोड़ रुपये की खरीदारी

शक है कि ये गड़बड़ियां सिर्फ मौजूदा टेंडर में ही नहीं, बल्कि कई वर्षों से चल रही थीं. जांच में पता चला कि TTD ने 2015 से 2025 के बीच वीआरएस एक्सपोर्ट और उसकी सहयोगी कंपनियों, तिरुमला फैब्रिक्स, नन्ना कॉटेज और VM राजा पावरलूम यूनिट से लगभग 54.95 करोड़ रुपये के कपड़े खरीदे. तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) बोर्ड ने ACB जांच के आदेश दिए हैं.

टीटीडी चेयरमैन बीआर नायडू के नेतृत्व में TTD बोर्ड ने विजिलेंस रिपोर्ट देखने के बाद, एक महीने पहले हुई मीटिंग में मौजूदा टेंडर तुरंत कैंसिल करने, ACB से मामले की पूरी जांच कराने, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एक्शन लेने और TTD के साथ धोखाधड़ी करने वाले कॉन्ट्रैक्टर के खिलाफ आपराधिक केस फाइल करने का फैसला किया.

शॉल खरीद में अनियमितता की पुष्टि

TTD के चेयरमैन बीआर नायडू ने बुधवार को एक्स पोस्ट में कहा कि मौजूदा गवर्निंग बॉडी ने TTD को शुद्ध सिल्क शॉल की जगह पॉलिएस्टर शॉल सप्लाई करने के घोटाले की पूरी जांच शुरू कर दी है. उन्होंने अंदाजा लगाया कि 2019 से अब तक 80-90 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार हुआ होगा. उन्होंने कहा कि सोने और चांदी की जरी और सिल्क मार्क सर्टिफिकेशन वाले शुद्ध प्राकृतिक जंगली रेशम वाली सिल्क शॉल सप्लाई किए जाने थे, लेकिन गुणवत्ता मानक को नजरअंदाज किया गया. उन्होंने कहा कि ACB जांच की रिपोर्ट मिलते ही सख्त एक्शन लिया जाएगा, जिसके आदेश दे दिए गए हैं.

टीटीडी चेयरमैन ने बताया कि पिछली सरकार के समय में मिलावटी घी, घटिया सामान, परकामनी (चढ़ावे की गिनती) में चोरी और टेंडर में हेराफेरी जैसे कई भ्रष्टाचार के मामले सामने आए थे, और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है.


Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *